की मुख़रे पर धूल लगी माना
माथा फूटा माना लेकिन
की मुख़रे पर धूल लगी माना
माथा फूटा माना लेकिन
गालों पर थप्पड़ खाये है
जबरा टुटा माना लेकिन
माना की साँसें उखड़ रही
और धक्का लगता धड़कन से
लो मान लिया की कांप गया है
पूर्ण बदन अंतरमन से
पर आँखों से अंगारे मै नथूनों से तूफा लाऊगा
मैं गिर गिर कर भी धरती पर हर
बार खड़ा हो जाऊंगा,
मुट्ठी में भीच लिया तारा तुम
नगर में ढोल पिटा दो जी
की अंधेरे हो लाख घने पर अंधेरे अनंत नही,
गिर जाना मेरा अंत नही
गिर जाना मेरा अंत नही ।
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