Monday, July 11, 2022

गिर जाना मेरा अंत नही

की मुख़रे पर धूल लगी माना

माथा फूटा माना लेकिन 

की मुख़रे पर धूल लगी माना

माथा फूटा माना  लेकिन 

गालों पर थप्पड़ खाये है

जबरा टुटा माना लेकिन

माना की साँसें उखड़ रही 

और धक्का लगता धड़कन से

लो मान लिया की कांप गया है 

पूर्ण बदन अंतरमन से

पर आँखों से अंगारे मै नथूनों से तूफा लाऊगा

मैं गिर गिर कर भी धरती पर हर 

बार खड़ा हो जाऊंगा,

मुट्ठी में भीच लिया तारा तुम

 नगर में ढोल पिटा दो जी 

की अंधेरे हो लाख घने पर अंधेरे अनंत नही,

गिर जाना मेरा अंत नही 

गिर जाना मेरा अंत नही ।

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