Thursday, October 1, 2026

कविता न 2 WAITING HAI


’’कुछ सोए हुए, कुछ जागते से,

कुछ ऊँघते, सरपत भागते से।


"कुछ सोए हुए, कुछ जागते से,

 कुछ ऊँघते, सरपत भागते से।

 कुछ रंग, बिरंग फीका कुछ,

 चटपटे ते़ज़ और भीठे कुछ।

 हर सपने मे तुम आते हो,

 फिर जागूँ तो खो जाते हो।

 क्यों चले गए, कुछ बोलो तो,

 एक बार को आँख खोलो तो।

 कुछ और नही ंतो दांत ही दो,

 हम सब में खुद को बॉट  ही दो।

 वापस आएँगे नही बोलेंगे,

 एक बार लिपट के रो लेंगे.’’  

                       | SOURCE :  WAITING HAI

Saturday, September 26, 2026

कविता न 1 WAITING HAI

 

शायरी

ना उम्मीदें होती ना

शिकायते होती है़

कमज़ोर रिश्तें मे बङी

रियायतें होती है।

 

                    | SOURCE :  WAITING HAI

Sunday, October 5, 2025

घर की याद

 

 

घर की याद

 

आज पानी गिर रहा है,

बहुत पानी गिर रहा है,

 

रात-भर गिरता रहा है,

प्राण मन घिरता रहा है,

 

अब सवेरा हो गया है,

कब सवेरा हो गया है,

 

ठीक से मैंने न जाना,

बहुत सोकर सिर्फ़ माना—

 

क्योंकि बादल की अँधेरी,

है अभी तक भी घनेरी,

 

अभी तक चुपचाप है सब,

रातवाली छाप है सब,

 

गिर रहा पानी झरा-झर,

हिल रहे पत्ते हरा-हर,

 

बह रही है हवा सर-सर,

काँपते हैं प्राण थर-थर,

 

बहुत पानी गिर रहा है,

घर नज़र में तिर रहा है,

 

घर कि मुझसे दूर है जो,

घर ख़ुशी का पूर है जो,

 

घर कि घर में चार भाई,

मायके में बहिन आई,

 

बहिन आई बाप के घर,

हाय रे परिताप के घर!

 

आज का दिन दिन नहीं है,

क्योंकि इसका छिन नहीं है,

 

एक छिन सौ बरस है रे,

हाय कैसा तरस है रे,

 

घर कि घर में सब जुड़े हैं,

सब कि इतने तब जुड़े हैं,

 

चार भाई चार बहिनें,

भुजा भाई प्यार बहिनें,

 

और माँ बिन-पढ़ी मेरी,

दुःख में वह गढ़ी मेरी,

 

माँ कि जिसकी गोद में सिर,

रख लिया तो दुख नहीं फिर,

 

माँ कि जिसकी स्नेह-धारा

का यहाँ तक भी पसारा,

 

उसे लिखना नहीं आता,

जो कि उसका पत्र पाता।

 

और पानी गिर रहा है,

घर चतुर्दिक् घिर रहा है,

 

पिताजी भोले बहादुर,

वज्र-भुज नवनीत-सा उर,

 

पिताजी जिनको बुढ़ापा,

एक क्षण भी नहीं व्यापा,

 

जो अभी दौड़ जाएँ,

जो अभी भी खिल-खिलाएँ,

 

मौत के आगे न हिचकें,

शेर के आगे न बिचकें,

 

बोल में बादल गरजता,

काम में झंझा लरजता,

 

आज गीता पाठ करके,

दंड दो सौ साठ करके,

 

ख़ूब मुगदर हिला लेकर,

मूठ उनकी मिला लेकर,

 

जब कि नीचे आए होंगे

नैन जल से छाए होंगे,

 

हाय, पानी गिर रहा है,

घर नज़र में तिर रहा है,

 

चार भाई चार बहिनें,

भुजा भाई प्यार बहिनें,

 

खेलते या खड़े होंगे,

नज़र उनकी पड़े होंगे।

 

पिताजी जिनको बुढ़ापा,

एक क्षण भी नहीं व्यापा,

 

रो पड़े होंगे बराबर,

पाँचवें का नाम लेकर,

 

पाँचवाँ मैं हूँ अभागा,

जिसे सोने पर सुहागा,

 

पिताजी कहते रहे हैं,

प्यार में बहते रहे हैं,

 

आज उनके स्वर्ण बेटे,

लगे होंगे उन्हें हेटे,

 

क्योंकि मैं उन पर सुहागा

बँधा बैठा हूँ अभागा,

 

और माँ ने कहा होगा,

दुःख कितना बहा होगा

 

आँख में किस लिए पानी,

वहाँ अच्छा है भवानी,

 

वह तुम्हारा मन समझ कर,

और अपनापन समझ कर,

 

गया है सो ठीक ही है,

यह तुम्हारी लीक ही है,

 

पाँव जो पीछे हटाता,

कोख को मेरी लजाता,

 

इस तरह होओ न कच्चे,

रो पड़ेगे और बच्चे,

 

पिताजी ने कहा होगा,

हाय कितना सहा होगा,

 

कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ,

धीर मैं खोता, कहाँ हूँ,

 

गिर रहा है आज पानी,

याद आता है भवानी,

 

उसे थी बरसात प्यारी,

रात-दिन की झड़ी झारी,

 

खुले सिर नंगे बदन वह,

घूमता फिरता मगन वह,

 

बड़े बाड़े में कि जाता,

बीज लौकी का लगाता,

 

तुझे बतलाता कि बेला

ने फलानी फूल झेला,

 

तू कि उसके साथ जाती,

आज इससे याद आती,

 

मैं न रोऊँगा,—कहा होगा,

और फिर पानी बहा होगा,

 

दृश्य उसके बाद का रे,

पाँचवे की याद का रे,

 

भाई पागल, बहिन पागल,

और अम्मा ठीक बादल,

 

और भौजी और सरला,,

सहज पानी, सहज तरला,

 

शर्म से रो भी न पाएँ,

ख़ूब भीतर छटपटाएँ,

 

आज ऐसा कुछ हुआ होगा,

आज सबका मन चुआ होगा।

 

अभी पानी थम गया है,

मन निहायत नम गया है,

 

एक-से बादल जमे हैं,

गगन-भर फैले रमे हैं,

 

ढेर है उनका, न फाँकें,

जो कि किरने झुकें-झाँकें,

 

लग रहे हैं वे मुझे यों,

माँ कि आँगन लीप दे ज्यों,

 

गगन-आँगन की लुनाई,

दिशा के मन से समाई,

 

दश-दिशा चुपचार है रे,

स्वस्थ की छाप है रे,

 

झाड़ आँखें बंद करके,

साँस सुस्थिर मंद करके,

 

हिले बिन चुपके खड़े हैं,

क्षितिज पर जैसे जड़े हैं,

 

एक पंछी बोलता है,

घाव उर के खोलता है,

 

आदमी के उर बिचारे,

किस लिए इतनी तृषा रे,

 

तू ज़रा-सा दुःख कितना,

सह सकेगा क्या कि इतना,

 

और इस पर बस नहीं है,

बस बिना कुछ रस नहीं है,

 

हवा आई उड़ चला तू,

लहर आई मुड़ चला तू,

 

लगा झटका टूट बैठा,

गिरा नीचे फूट बैठा,

 

तू कि प्रिय से दूर होकर,

बह चला रे पूर होकर

 

दुःख भर क्या पास तेरे,

अश्रु सिंचित हास तेरे!

 

पिताजी का वेश मुझको,

दे रहा है क्लेश मुझको,

 

देह एक पहाड़ जैसे,

मन कि बड़ का झाड़ जैसे

 

एक पत्ता टूट जाए,

बस कि धारा फूट जाए,

 

एक हल्की चोट लग ले,

दूध की नद्दी उमग ले,

 

एक टहनी कम न होले,

कम कहाँ कि ख़म न होले,

 

ध्यान कितना फ़िक्र कितनी,

डाल जितनी जड़ें उतनी!

 

इस तरह का हाल उनका,

इस तरह का ख़याल उनका,

 

हवा, उनको धीर देना,

यह नहीं जी चीर देना,

 

हे सजीले हरे सावन,

हे कि मेरे पुण्य पावन,

 

तुम बरस लो वे न बरसें,

पाँचवें को वे न तरसें,

 

मैं मज़े में हूँ सही है,

घर नहीं हूँ बस यही है,

 

किंतु यह बस बड़ा बस है,

इसी बस से सब विरस है,

 

किंतु उससे यह न कहना,

उन्हें देते धीर रहना,

 

उन्हें कहना लिख रहा हूँ,

मत करो कुछ शोक कहना,

 

और कहना मस्त हूँ मैं,

कातने में व्यस्त हूँ मैं,

 

वज़न सत्तर सेर मेरा,

और भोजन ढेर मेरा,

 

कूदता हूँ, खेलता हूँ,

दुःख डट कर ठेलता हूँ,

 

और कहना मस्त हूँ मैं,

यों न कहना अस्त हूँ मैं,

 

हाय रे, ऐसा न कहना,

है कि जो वैसा न कहना,

 

कह न देना जागता हूँ,

आदमी से भागता हूँ,

 

कह न देना मौन हूँ मैं,

ख़ुद न समझूँ कौन हूँ मैं,

 

देखना कुछ बक न देना,

उन्हें कोई शक न देना,

 

हे सजीले हरे सावन,

हे कि मेरे पुण्य पावन,

 

तुम बरस लो वे न बरसें,

पाँचवें को वे न तरसें।

Friday, December 29, 2023

DOSTII

 भुलना चाहो तो भी 

याद हमारी आएगी ,

दिल की गहराई  में 

हमारी तस्वीर  बस जाएगी ,,

ढूंढ़ने चले हो 

हमसे बेहतर दोस्त 

तलाश हमसे शुरू होकर 

हम पर ही खत्म  हो जाएगी ,,

                                                                                                                      -- Nikhil Yadav

SOME THOUGHTS

I`M NOT A ROBOT; I HAVE A PERSONALITY AND I HAVE EMOTIONS. I HAVE  A HUMOROUS SIDE TO ME AND AN ANGRY SIDE TO ME.

                                                                                                                --Jeff Gordon

DO NOT FEAR MISSING OUT AT THE EXPENSE OF MISSING NOW .

                                                                                                                -- Brendon Burcha

YOU DON'T HAVE TO SEE THE WHOLE STAIRCASE, JUST TAKE THE FIRST STEP.     

                                                                                                         --Martin Luther King
INSTAGRAM : Nikhilyaduwanshi__17

Monday, July 11, 2022

गिर जाना मेरा अंत नही

की मुख़रे पर धूल लगी माना

माथा फूटा माना लेकिन 

की मुख़रे पर धूल लगी माना

माथा फूटा माना  लेकिन 

गालों पर थप्पड़ खाये है

जबरा टुटा माना लेकिन

माना की साँसें उखड़ रही 

और धक्का लगता धड़कन से

लो मान लिया की कांप गया है 

पूर्ण बदन अंतरमन से

पर आँखों से अंगारे मै नथूनों से तूफा लाऊगा

मैं गिर गिर कर भी धरती पर हर 

बार खड़ा हो जाऊंगा,

मुट्ठी में भीच लिया तारा तुम

 नगर में ढोल पिटा दो जी 

की अंधेरे हो लाख घने पर अंधेरे अनंत नही,

गिर जाना मेरा अंत नही 

गिर जाना मेरा अंत नही ।

Monday, July 5, 2021

MILLIKAN'S OIL DROP EXPERIMENT......

1.  Oil droplets in the form of mist , produced by the atomiser , were allowed to enter  through  a tiny hole in the upper plate of electrical condenser ..............

2.  The downward motion of these droplets was viewed through the TELESCOPE , equipped  with a micrometer eyepiece...

3. Measuring the rate of fall of these droplets, Millikan's was able to measure the mass of oil droplets . The air inside the chamber was ionized by passing a  beam of X-rays through it....

4. The electrical charge on these oil droplets was acquired by collisions  with electron....

5. The fall of these charged oil droplets can be retarded , accelerated or made stationary depending upon charge on the droplets and the polarity and strength of the voltage applied to the plate..

6. Millikan concluded that the magnitude of electrical charge, 'Q' o the droplets is always an  integral multiple  of the  electrical charge , 'E' that is q = ne, where  n = 1,2,3,.....




Tuesday, September 29, 2020

PREIODIC TABLE AND HERE IS THE LIST OF THE ELEMENTS STORED BY ATOMIC NUMBERS




Here is a list of the elements sorted by atomic number.

ElementSymbolAtomic numberAtomic weight
hydrogenH1[1.00784, 1.00811]
heliumHe24.002602
lithiumLi3[6.938, 6.997]
berylliumBe49.0121831
boronB5[10.806, 10.821]
carbonC6[12.0096, 12.0116]
nitrogenN7[14.00643, 14.00728]
oxygenO8[15.99903, 15.99977]
fluorineF918.998403163
neonNe1020.1797
sodiumNa1122.98976928
magnesiumMg12[24.304, 24.307]
aluminum (aluminium)Al1326.9815385
siliconSi14[28.084, 28.086]
phosphorusP1530.973761998
sulfur (sulphur)S16[32.059, 32.076]
chlorineCl17[35.446, 35.457]
argonAr1839.948
potassiumK1939.0983
calciumCa2040.078
scandiumSc2144.955908
titaniumTi2247.867
vanadiumV2350.9415
chromiumCr2451.9961
manganeseMn2554.938044
ironFe2655.845
cobaltCo2758.933194
nickelNi2858.6934
copperCu2963.546
zincZn3065.38
galliumGa3169.723
germaniumGe3272.630
arsenicAs3374.921595
seleniumSe3478.971
bromineBr35[79.901, 79.907]
kryptonKr3683.798
rubidiumRb3785.4678
strontiumSr3887.62
yttriumY3988.90594
zirconiumZr4091.224
niobiumNb4192.90637
molybdenumMo4295.95
technetiumTc43(97)
rutheniumRu44101.07
rhodiumRh45102.90550
palladiumPd46106.42
silverAg47107.8682
cadmiumCd48112.414
indiumIn49114.818
tinSn50118.710
antimonySb51121.760
telluriumTe52127.60
iodineI53126.90447
xenonXe54131.293
cesium (caesium)Cs55132.90545196
bariumBa56137.327
lanthanumLa57138.90547
ceriumCe58140.116
praseodymiumPr59140.90766
neodymiumNd60144.242
promethiumPm61(145)
samariumSm62150.36
europiumEu63151.964
gadoliniumGd64157.25
terbiumTb65158.92535
dysprosiumDy66162.500
holmiumHo67164.93033
erbiumEr68167.259
thuliumTm69168.93422
ytterbiumYb70173.045
lutetiumLu71174.9668
hafniumHf72178.49
tantalumTa73180.94788
tungsten (wolfram)W74183.84
rheniumRe75186.207
osmiumOs76190.23
iridiumIr77192.217
platinumPt78195.084
goldAu79196.966569
mercuryHg80200.592
thalliumTl81[204.382, 204.385]
leadPb82207.2
bismuthBi83208.98040
poloniumPo84(209)
astatineAt85(210)
radonRn86(222)
franciumFr87(223)
radiumRa88(226)
actiniumAc89(227)
thoriumTh90232.0377
protactiniumPa91231.03588
uraniumU92238.02891
neptuniumNp93(237)
plutoniumPu94(244)
americiumAm95(243)
curiumCm96(247)
berkeliumBk97(247)
californiumCf98(251)
einsteiniumEs99(252)
fermiumFm100(257)
mendeleviumMd101(258)
nobeliumNo102(259)
lawrenciumLr103(262)
rutherfordiumRf104(263)
dubniumDb105(268)
seaborgiumSg106(271)
bohriumBh107(270)
hassiumHs108(270)
meitneriumMt109(278)
darmstadtiumDs110(281)
roentgeniumRg111(281)
coperniciumCn112(285)
ununtriumUut113(286)
fleroviumFl114(289)
ununpentiumUup115(289)
livermoriumLv116(293)
ununseptiumUus117(294)
ununoctiumUuo118(294)

कविता न 2 WAITING HAI

’’कुछ सोए हुए, कुछ जागते से, कुछ ऊँघते, सरपत भागते से। "कुछ सोए हुए, कुछ जागते से,  कुछ ऊँघते, सरपत भागते से।  कुछ रंग, बिरंग फीका कुछ,...